कफील खानCrime News 

बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामला, निर्दोष डॉ. कफील खान 2 साल बाद बरी

तारीख़ 10 अगस्त, 2017, जगह गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल. हॉस्पिटल में आक्सीजन की कमी से करीब 70 बच्चों की मौत हो जाती है. फिर इस विषय से सम्बन्धित डॉक्टर कफील खान को भ्रस्टाचार, विभागीय लापरवाही और ठीक तरह से सरकारी काम ना निपटने के आरोप तय कर, उन्हें सस्पेंड कर दिया जाता है. पर अब क़रीब 2 साल के बाद शिशु विभाग के निलंबित डॉक्टर कफील खान को विभागीय जांच समिति ने क्लीन चिट दे दी है. दरअसल जांच रिपोर्ट 16 अप्रैल को ही आ गयी थी, पर 26 सितम्बर को उन्हें विभाग की तरफ से क्लीन चिट दी गयी.

10 अगस्त, 2017 की रात को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जब डॉक्टर कफील अपनी रात की ड्यूटी पर थे, तब अचानक हॉस्पिटल में आक्सीजन की सप्लाई ख़त्म हो गयी, जिससे आईसीयू में भर्ती कई नवजात शिशुओं और बच्चों की मौत हो गयी. उस वक़्त पर डॉ. ने बाहर से आक्सीजन सिलेंडर मंगवा कर कई बच्चों की जान बचाई, जिससे उनकी बहुत तारीफ़ भी हुई. पर 22 अगस्त को उन पर भ्रस्टाचार के आरोप लगे और उन पर विभागी जांच बैठाई गयी और उन्हें निलंबित कर दिया गया. इसके बाद कफील को गिरफ्तार कर लिया गया और करीब 9 महीने बाद उन्हें कोर्ट से ज़मानत मिली. 

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इसके बाद जब डॉ. हाईकोर्ट गए और मार्च 2019 में कोर्ट ने विभागीय जांच को 90 दिनों में पूरा करने का आदेश दिया. उसके बाद डॉ. कफील खान को पूरे 2 साल के बाद बेगुनाह साबित किया गया और मामले में उन्हें क्लीन चिट मिली. विभागीय जांच की 15 पन्नों की रिपोर्ट में ये साफ़ किया गया है, कि डॉ. कफील इन्सेफ़लाइटिस वार्ड के नोडल ऑफिसर नहीं थे, इसलिए ये उनकी लापरवाही नहीं थी, जिसकी वजह से बच्चों की मौत हुई है.

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